{करवा चौथ} Karva Chauth Katha in Hindi | Diwali 2017 Wallpapers, Quotes, Status, DP, Tips, Wishes

{करवा चौथ} Karva Chauth Katha in Hindi

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Karva Chauth Katha in Hindi

करवा चौथ की पौराणिक व्रत कथा

बहुत समाए पहले की बात है, एक साहूकार के चार बेटे थे व एक बहन थी जिसका नाम करवा था| करवा के सातो भाई अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे| सातो भाई पहले अपनी बहन को खाना खिलते व उसके बाद स्वयं भोजन.खाते थे|
एक बार उनकी बहन करवा ससुराल से माएके आई| शाम को जब भाई अपना व्यापार-व्यवसाय बंद करके घर लौटे तो उन्होने देखा की उनकी बहन व्याकुल थी| सभी भाई भोजन करने बैठे और अपनी बहन से भी अनुग्रह करने लगे के वो भी भोजन ग्रहण करे| तभी बहन ने उन्हे बताया की आज उसका करवा चौथ का निर्जाला व्रत है और वो चंद्रमा को अर्क देने के बाद ही भोजन ग्रहण करेगी| क्यूकी अभी तक चंद्रमा नही निकला इसी कारण वो भूख प्यास से व्याकुल हो रही है|
सबसे छोटे भाई से यह व्याकुलता देखी नही जाती और वो डोर के एक पीपल के पेड़ पा एक दीपक जलाकर चलनी के ओट मे रख देता है| डोर से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है की जैसे चतुर्थी का चाँद निकल रहा हो|
इसके बाद भाई अपने बहन को बताता है के चाँद निकल आया है, अब तुम उसे अर्क देने के बाद भोजन ग्रहण कर सकती हो| बहन बड़ी खुशी से छत की तरफ जाती है व चाँद को अर्क दे देती है और खाना खाने बैठ जाती है|
जैसे ही बहन पहला नीवाला कहंती है तो उसे छींक आ जाती है| दूसरा नीवाला खाती है तो उसमे बाल आ जाता है| जैसे ही वो तीसरा नीवाला खाने की कोशिश करती है तभी उसके पति की मृत्यु का समाचार आ जाता है| करवा बौखला जाती है|
करवा की भाभी उसे सचाई से अवगत करवाती है की ये सब उसके साथ क्यू हुआ| करवा चौथ का व्रत ग़लत तरीके से टूटने के कारण उसके साथ ये सब हुआ| देवता उससे नाराज़ हो गये और उशी कारण उसके साथ ये सब हुआ|
सचाई जानने के बाद करवा निश्चाए करती है के वह अपने पति का अंतिम संस्कार ना इहोने देगी और उसको पुनर्जीवन दिलवा कर रहेगी| वह पूरे के साल तक अपने पति के शव के पास बैठती है| वह अपने पति के शव की देखभाल करती है तथा उसके उपर उगने वाली सूइनुमा घास को एकत्रित करती है|

एक साल बाद दोबारा करवा चौथ का दिन आ जाता है| उसकी सभी भाभीया करवा चौथ का व्रत करती है| जब भाभीया उसके पास आशीर्वाद लेने आती है तो वह प्रत्येक भाभी से "यम सूई ले लो, पिय सूई दे दो, मुझे भी अपनी जैसी सुहागन बना दो" ऐसा आग्रह करने लग जाती है, लेकिन हर बार भाभी उसे अगली भाभी से आग्रह करने को कहती है|
इसी तरह जब छठे नंबर की भाभी आती है तो उनसे भी वह यही दोहराती है| यह भाभी उसे बताती है के क्यूकी छोटे भाई ने ही व्रत ग़लत तरीके से तुडवाया था तो उसकी पत्नी मे ही यह शक्ति है के वह तुम्हारे पति को जीवित कर सके| जब तुम्हारे छोटे भाई की पत्नी आ जाए तो उसको पकड़ लेना और जाने नही देना जब तक वह तुम्हारे पति को जीवित ना कर्दे|
सबसे अंत मे उसकी छोटी भाभी आती है| करवा उनसे भी वही सुहागन करने का आग्रह करती है| छोटी भाभी टालमटोल करने लगती है| यह देख करवा उन्हे कासके पकड़ लेती है और अपने पति को जीवित करने को कहती है|
अंत मे उसकी तपस्या को देख भाभी को तरस आ जाता है और वह अपनी छोटी उंगली को चीर कर अमराट करवा के पति के मूह मे दल देती है| इस प्रकार करवा को उसका सुहाग वापस मिल जाता है|

हे श्री गणेश - मा गौरी जिस प्रकार करवा को चिर सुहागन होने का वरदान आपसे मिला, वैसे ही सब सुहागनो को मिले|

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